Nakha: Difference between revisions
Appearance
No edit summary |
No edit summary |
||
| Line 16: | Line 16: | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| page_title = Nakha | | page_title = Nakha | ||
| | | commentary1 = balabodhini | ||
| | | label1 = बालबोधिनी | ||
| commentary2 = mandabodhini | |||
| label2 = मन्दबोधिनी | |||
| verse_text = पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटाकुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटुप्रत्येकवज्रायिताः । | | verse_text = पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटाकुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटुप्रत्येकवज्रायिताः । | ||
श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरादारितारातिदूरप्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता (नाकिवृन्दैः) भूरिभागैः ॥१॥ | श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरादारितारातिदूरप्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता (नाकिवृन्दैः) भूरिभागैः ॥१॥ | ||
| Line 28: | Line 30: | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| page_title = Nakha | | page_title = Nakha | ||
| | | commentary1 = balabodhini | ||
| | | label1 = बालबोधिनी | ||
| commentary2 = mandabodhini | |||
| label2 = मन्दबोधिनी | |||
| verse_text = लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि(वि)कलयन्नैवेशितुस्ते समं पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोऽपास्तं रसो योऽष्टमः । | | verse_text = लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि(वि)कलयन्नैवेशितुस्ते समं पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोऽपास्तं रसो योऽष्टमः । | ||
यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटलिप्रान्तोत्थिताग्निस्फुरत्खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥२॥ | यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटलिप्रान्तोत्थिताग्निस्फुरत्खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥२॥ | ||
Revision as of 07:37, 10 March 2026
Nakha
नरसिंहनखस्तोत्रम् | Bālabodhini | Mandabodhini
पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटाकुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटुप्रत्येकवज्रायिताः ।
श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरादारितारातिदूरप्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता (नाकिवृन्दैः) भूरिभागैः ॥१॥
लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि(वि)कलयन्नैवेशितुस्ते समं पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोऽपास्तं रसो योऽष्टमः ।
यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटलिप्रान्तोत्थिताग्निस्फुरत्खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥२॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितं ॥