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| == तृतीयः पादः ==
| | #REDIRECT [[Anuvyakyanam#AV_C04_S03]] |
| {{Adhyaya
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| | document_id = AV
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| | chapter_num = 4
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| | title = तृतीयः पादः
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| }}उत्क्रान्तमार्गश्च विमुक्तगम्यं पादोदितं सुक्रमविक्रमौ च ॥1॥
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| सान्तनिकप्राप्तिरभीष्टता च सौकर्यमित्यन्यमतस्य तर्काः ।विशेषसमप्राप्तिरुरुत्वमाप्तिः क्रमानुरागः कथितानुवृत्तिः ॥2॥
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| === कार्याधिकरणम् ===
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| {{VerseBlock
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| | verse_id = AV_C04_S03_V01
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| | document_id = AV
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| | chapter_id = AV_C04
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| | verse_type = sutra
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| | verse_line1 = सिद्धान्तनिर्णीतिकराः प्रतीकं देहादिकं तद्गतमेव ये नराः ।उपासते ते पुरतः समाप्नुयुर्ब्रह्माणमस्मान्मतिमाप्य विष्णुम् ॥3॥
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| }}
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| {{Bhashyam
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| | verse_id = AV_C04_S03
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| | id = AV_C04_S03_author-note
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| | text =
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| इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते ब्रह्मसूत्रानुव्याख्याने चतुर्थाध्यायस्य तृतीयः पादः ॥
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| }}
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| [[Category:Anuvyakyanam]] | |