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| == प्रथमः पादः ==
| | #REDIRECT [[Anuvyakyanam#AV_C03_S01]] |
| {{Adhyaya
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| | document_id = AV
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| | chapter_num = 3
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| | title = प्रथमः पादः
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| }}स्वाभाविकान्यथानामसहभावान्ययोक्तयः ॥1॥
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| अविशेषविशेषौ च सहभाIो विमिश्रता ।विरुद्धोक्तिः सहस्थानं वैयर्थ्यं चान्यथागतिः ॥ 2 ॥
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| युक्तयः पूर्वपक्षस्य गुणाधिक्यर्थतो भवौ ।उपपत्तिद्विरूपत्वमाधिक्यमनुरूपता ॥3॥
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| योग्यता बलवत्त्वं च विभागः कारणाभवः ।क्लृप्तिरन्या गतिश्चैव सिद्धान्तस्यैव साधकाः ॥4॥
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| बीजपूरुषयोनीनां सङ्गातिनियमोज्झितिम् ।अथशब्देन भगवानाह कारणतश्च ताम् ॥4॥
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| {{Bhashyam
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| | verse_id = AV_C03_S01
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| | id = AV_C03_S01_author-note
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| | text =
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| इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते ब्रह्मसूत्रानुव्याख्याने तृतीयाध्यायस्य प्रथमः पादः ॥
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| }}
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| [[Category:Anuvyakyanam]] | |