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| == तृतीयः पादः ==
| | #REDIRECT [[Anuvyakyanam#AV_C02_S03]] |
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| | chapter_num = 2
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| | title = तृतीयः पादः
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| }}अथाशेषसमाम्नायविरोधापाकृतिं प्रभुः ।करिष्यन् अधिदैवाधिभूतजीवपरात्मनाम् ॥1॥
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| स्वरूपनिर्णयायैव वचनानां परस्परम् ।पादेनानेनाविरोधं दर्शयत्यमितद्युतिः ॥2॥
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| अनुभूतियुक्तिबहुवाग्वैलोम्यं च ततोऽधिकम् ।एतत्सर्वं सतः साम्यं द्वारवैयर्थ्यमेव च ॥3॥
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| दृष्टयुक्त्यनुसारित्वमुक्तान्यार्थाविरोधतः ।प्रसिद्धनामस्वीकारे बहुवाक्यानुवर्तिता ॥4॥
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| लोकदृष्टानुसारित्वं जीवसाम्यमनादिता ।तत्र तत्र परिज्ञानं गुणसाम्यश्रुती तथा ॥5॥
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| उत्पत्तिमत्वं स्वगुणाननुभूत्यल्पकल्पने ।नानाश्रुतिश्च वैचित्र्यं युक्तयः पूर्वपक्षगाः ॥6॥
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| व्यवस्थानुपपत्तिश्च स्वातन्त्र्यमनुसारिता ।मुख्यता शक्तिमत्त्वं च वैरूप्यं सर्वसङ्ग्रहः ॥7॥
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| गत्यादिरीशशक्तिश्च सर्वमानविरोधिता ।अभीष्टासिद्धिसुव्यक्ती शास्त्रसिद्धिर्विपर्ययः ॥8॥
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| विशेषकारणं चेति सिद्धान्तस्यैव साधिकाः ।
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| === वियदधिकरणम् ===
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| | verse_line1 = प्रकृतिः पुरुषः कालो वेदास्तदभिमानिनः(देवास्तदभिमानिनः) ॥9॥
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| === मातरिश्वाधिकरणम् ===
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| | verse_line1 = एवं प्रलयकालेऽपि प्रतिभातपरावरः ।मुख्यवायुर्नित्यसमः शरीरोत्पत्तिकारणात् ॥20॥
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| === असम्भवाधिकरणम् ===
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| | verse_line1 = ...... स्वतन्त्रत्वात् परात्मनः ॥24॥
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| === व्यतिरेकाधिकरणम् ===
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| | verse_line1 = अच्छेद्यस्यापि जीवस्य विभागं बहुधा हरिः ॥25॥
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| === पृथगधिकरणम् ===
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| | verse_line1 = एवं स्थितेऽपि जीवैक्यं केचिदाहुः परात्मना ।तद्योऽहमिति पूर्वाभिः श्रुतिभिश्चानुमाबलात् ॥28॥
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| === अंशाधिकरणम् ===
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| | verse_line1 = भेदस्य मुक्तौ वचनादापि तत्पक्षनिग्रहः ॥81॥
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| इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते ब्रह्मसूत्रानुव्याख्याने द्वितीयाध्यायस्य तृतीयः पादः ॥
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| [[Category:Anuvyakyanam]] | |