Bruhadaranyaka/C5/S18: Difference between revisions
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| verse_line1 = क्षत्रं प्राणो वै क्षत्रं प्राणे हि वै क्षत्रं त्रायते हैनं प्राणः क्षणितोः प्र क्षत्रमत्र प्राप्नोति क्षत्रस्य सायुज्यं सलोकतां जयति य एवं वेद ॥ | | verse_line1 = क्षत्रं प्राणो वै क्षत्रं प्राणे हि वै क्षत्रं त्रायते हैनं प्राणः क्षणितोः प्र क्षत्रमत्र प्राप्नोति क्षत्रस्य सायुज्यं सलोकतां जयति य एवं वेद ॥ | ||
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Revision as of 07:06, 9 April 2026
क्षत्रं प्राणो वै क्षत्रं प्राणे हि वै क्षत्रं त्रायते हैनं प्राणः क्षणितोः प्र क्षत्रमत्र प्राप्नोति क्षत्रस्य सायुज्यं सलोकतां जयति य एवं वेद ॥
उत्थापनादुक्थनामा मोक्षे प्राप्यो यतोऽखिलैः ।
यजुश्चाथ क्षतात्त्राणात् क्षत्रं सम्यक्त्वकारणात् ॥सर्वेषां साम च प्रोक्तो वायुरेव जगत्पतिः ॥ इति च ॥ १३ ॥