Bhagavatatatparyanirnaya/C10/S52: Difference between revisions
Appearance
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
||
| Line 4: | Line 4: | ||
| title = द्विपञ्चाशोऽध्यायः | | title = द्विपञ्चाशोऽध्यायः | ||
}} | }} | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| verse_id = BTN_C10_S52_V20 | | verse_id = BTN_C10_S52_V20 | ||
| Line 13: | Line 11: | ||
| verse_line1 = फलमूलकृताहारं वृतं शिष्यशतैर्मुनिम् । | | verse_line1 = फलमूलकृताहारं वृतं शिष्यशतैर्मुनिम् । | ||
| verse_line2 = दृष्ट्वा परमसन्तुष्टौ रामकृष्णौ जगत्पती ॥ २० ॥ | | verse_line2 = दृष्ट्वा परमसन्तुष्टौ रामकृष्णौ जगत्पती ॥ २० ॥ | ||
| commentary1 = bhagavatatatparyanirnaya | |||
}} | }} | ||
| Line 31: | Line 30: | ||
| verse_line1 = नमस्ते भार्गव श्रीमन् जामदग्न्य तपोधन । | | verse_line1 = नमस्ते भार्गव श्रीमन् जामदग्न्य तपोधन । | ||
| verse_line2 = रामकृष्णौ स्मृतावावां क्वचित् ते श्रवणं गतौ ॥ २२ ॥ | | verse_line2 = रामकृष्णौ स्मृतावावां क्वचित् ते श्रवणं गतौ ॥ २२ ॥ | ||
| commentary1 = bhagavatatatparyanirnaya | |||
}} | }} | ||
Revision as of 07:04, 9 April 2026
फलमूलकृताहारं वृतं शिष्यशतैर्मुनिम् ।दृष्ट्वा परमसन्तुष्टौ रामकृष्णौ जगत्पती ॥ २० ॥
प्रणामं चक्रतुर्वीरौ यथान्यायमतन्द्रितौ ।इदं चोवाच भगवान् कृष्णस्तं मुनिपुङ्गवम् ॥ २१ ॥
नमस्ते भार्गव श्रीमन् जामदग्न्य तपोधन ।रामकृष्णौ स्मृतावावां क्वचित् ते श्रवणं गतौ ॥ २२ ॥
॥ इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीभागवततात्पर्यनिर्णये दशमस्कन्धे द्विपञ्चाशोऽध्यायः ॥
'सर्वावताराभिन्नोऽपि समशक्तिरपि स्वयम् ।पूज्यपूजकनीचोच्चं मोहनाय दुरात्मनाम् ॥अखण्डैकरसो विष्णुर्दर्शयेत्तत्र तत्र हि ॥इति षाड्गुण्ये ॥२०-२२॥