Bruhadaranyaka/C5/S10: Difference between revisions
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Revision as of 04:44, 9 April 2026
दशमं ब्राह्मणम्
वाचं धेनुमुपासीत तस्याश्चत्वारः स्तनाः स्वाहाकारो वषट्कारो हन्तकारः स्वधाकारस्तस्यै द्वौ स्तनौ देवा उपजीवन्ति स्वाहाकारं च वषट्कारं च हन्तकारं मनुष्याः स्वधाकारं पितरस्तस्याः प्राण ऋषभो मनो वत्सः ॥
॥ इति बृहदारण्यकोपनिषदि सप्तमाध्याये दशमं ब्राह्मणम् ॥
॥ इति बृहद्भाष्ये सप्तमाध्याये दशमं ब्राह्मणम् ॥ ८ ॥
सरस्वती तु गोरूपा तस्या देवादयोऽखिलाः ।
स्तनानेवोपजीवन्ति तस्या वायुः पतिः प्रभुः ॥वत्सो मनोऽभिमान्यस्याः सरस्वत्याः सदाशिवः ॥ इति प्रभंजने ।