Bruhadaranyaka/C5/S1: Difference between revisions
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Revision as of 04:44, 9 April 2026
प्रथमं ब्राह्मणम्
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥
अवतारा महाविष्णोः सर्वे पूर्णाः प्रकीर्तिताः ।
पूर्णं च तत्परं रूपं पूर्णात् पूर्णाः समुद्गताः ॥
परावरत्वं तेषां तु व्यक्तिमात्रविशेषतः ।
न देशकालसामथ्यैः पारावर्यं कथञ्चन ॥
पूर्वरूपस्य पूर्णस्य पूर्णं यदवतारगम् ।
रूपं तदात्मन्यादाय पूर्णमेवावतिष्ठते ॥
लौकिकव्यवहारो यो भूभारक्षपणादिकः ।
तददृष्टिं विना नान्यो लयः कृष्णादिनां क्वचित् ॥ॐ खं ब्रह्म खं पुराणं वायुरं खमिति ह स्माह कौरव्यायणीपुत्रो वेदोऽयं ब्राह्मणा विदुर्वेदेनैन यद्वेदितव्यम् ॥
॥ इति बृहदारण्यकोपनिषदि सप्तमाध्याये प्रथमं ब्राह्मणम् ॥
॥ इति बृहद्भाष्ये प्रथमं ब्राह्मणम् ॥ १ ॥
ओताः सर्वगुणाः यस्मादस्मिन्नों विष्णुरुच्यते ।
खं प्रकाशस्वरूपत्वात् ब्रह्मतद्व्याप्तरूपतः ॥
पुनः खं सुखरूपत्वम् पुराणं तदनादितः ॥
वायोश्च रतिदं यस्माद्वायुरं ब्रह्म तत्परम् ।
ख्यातत्वाच्चापि तत्खं स्याद्रौहिणेयस्तथाऽवदत् ॥
वेदोऽयं ज्ञानरूपत्वादिति यं ब्राह्मणा विदुः ।
निर्दोषत्वाद इत्युक्तस्तेन वेद्यं सदाऽखिलम् ॥ इति च ।बाह्लीकसुता हि रोहिणी । अतो बलभद्रः कौरव्यायणीपुत्रः ॥