Bruhadaranyaka/C4/S6: Difference between revisions
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| verse_line6 = सनकः परमेष्ठिनः। | |||
| verse_line7 = परमेष्ठी ब्रह्मणो ब्रह्म स्वयम्भुब्रह्मणे नमः ॥ ३ ॥ | |||
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{{AuthorNote| text = ॥ इति वंशब्राह्मणम् ॥}} | |||
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{{AuthorNote| text = इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीमद्बृहदारण्यकोपनिषद्भाष्ये षष्ठोऽध्यायः ॥}} | |||
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अवरेभ्योऽपि शृण्वन्ति परमाश्च क्वचित् क्वचित् । | |||
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Revision as of 05:36, 8 April 2026
वंशब्राह्मणम्
अथ वंशः पौतिमाष्यो गौपवनात् ।गौपवनः पौतिमाष्यात् ।
गौतमः आग्निवेश्यादाग्निवेश्यः गार्ग्याद् ।गार्ग्यो गार्ग्याद् ।
कौशिकायनिः घृतकौशिकात्घृतकौशिकः पाराशर्यायणात् ।
अवरेभ्योऽपि शृण्वन्ति परमाश्च क्वचित् क्वचित् ।
लीलयैव न चैतेषां परमत्वं विहीयते ॥ इति च ॥