Nakha: Difference between revisions
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Revision as of 18:36, 4 March 2026
Nakha
नरसिंहनखस्तोत्रम् |
Document ID: NNS |
Bālabodhini |
Mandabodhini
पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटाकुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटुप्रत्येकवज्रायिताः ।
श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरादारितारातिदूरप्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता (नाकिवृन्दैः) भूरिभागैः ॥१॥
श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरादारितारातिदूरप्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता (नाकिवृन्दैः) भूरिभागैः ॥१॥
लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि(वि)कलयन्नैवेशितुस्ते समं पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोऽपास्तं रसो योऽष्टमः ।
यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटलिप्रान्तोत्थिताग्निस्फुरत्खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥२॥
यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटलिप्रान्तोत्थिताग्निस्फुरत्खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥२॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितं Nakha ॥