Bruhadaranyaka/C5/S11: Difference between revisions
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अग्निनामा तु भगवानौदर्याग्नौ प्रतिष्ठितः । | अग्निनामा तु भगवानौदर्याग्नौ प्रतिष्ठितः । | ||
Revision as of 09:03, 10 April 2026
अयमग्निर्वैश्वानरो योऽयमन्तःपुरुषे येनेदमन्नं पच्यते यदिदमद्यते तस्यैष घोषो भवति यमेतत् कर्णावपिधाय शृणोति स यदोत्क्रमिष्यन् भवति नैनं घोषं शृणोति ॥
॥ इति बृहदारण्यकोपनिषदि सप्तमाध्याये एकादशं ब्राह्मणम् ॥
॥ इति बृहद्भाष्ये सप्तमाध्याये एकादशं ब्राह्मणम् ॥
अग्निनामा तु भगवानौदर्याग्नौ प्रतिष्ठितः ।
विश्वैर्गुणैः समेतत्वादनन्तत्वाच्च स प्रभुः ॥ वैश्वानर इति प्रोक्तः सोऽग्निरंगप्रणेतृतः । तस्य विष्णोस्तुतिरियं क्रियते वायुना सदा ॥
कर्णौ पिधाय या नित्यं श्रोतुं शक्याऽखिलैः सदा ॥ इति तंत्रमालायाम् ॥