Bruhadaranyaka/C2/S6: Difference between revisions
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इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीमद्बृहदारण्यकोपनिषद्भाष्ये चतुर्थोऽध्यायः ॥ | इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीमद्बृहदारण्यकोपनिषद्भाष्ये चतुर्थोऽध्यायः ॥ | ||
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पाराशर्यो जातुकर्ण्यः पराशरसुतावुभौ । | पाराशर्यो जातुकर्ण्यः पराशरसुतावुभौ । | ||
Revision as of 09:03, 10 April 2026
अथ वंशः पौतिमाष्यो गौपवनात् ।गौपवनः पौतिमाष्यात् ।
आग्निवेश्यः शाण्डिल्याच्च अनभिम्लाताच्च ।अनभिम्लात आनभिम्लातादानभिम्लातो गौतमात् ।
धृतकौशिकात् धृतकौशिकः।पाराशर्यायणात् पाराशर्यायणः ।
॥ इति वंशब्राह्मणम् ॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीमद्बृहदारण्यकोपनिषद्भाष्ये चतुर्थोऽध्यायः ॥
पाराशर्यो जातुकर्ण्यः पराशरसुतावुभौ ।
विप्रायामेव भार्यायां तृतीयः कृष्ण एव च ॥ इति ब्रह्माण्डे । परस्य ब्रह्मणो विष्णोर्हयशीर्षादधीतवान् ।
ब्रह्मविद्यामिमां ब्रह्मा ततः सनक एव च ॥ इति गारुडे ॥