Bhagavatatatparyanirnaya/C5/S1: Difference between revisions
Appearance
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
||
| Line 15: | Line 15: | ||
}} | }} | ||
{{ | {{Bhashyam | ||
| verse_id = BTN_C05_S01_V19 | | verse_id = BTN_C05_S01_V19 | ||
| id = BTN_C05_S01_V19_B1 | | id = BTN_C05_S01_V19_B1 | ||
| text = | | text = | ||
'विहितो यस्य यो धर्मो विष्णुना प्रभविष्णुना । | 'विहितो यस्य यो धर्मो विष्णुना प्रभविष्णुना । | ||
| Line 34: | Line 33: | ||
}} | }} | ||
{{ | {{Bhashyam | ||
| verse_id = BTN_C05_S01_V31 | | verse_id = BTN_C05_S01_V31 | ||
| id = BTN_C05_S01_V31_author-note | | id = BTN_C05_S01_V31_author-note | ||
| text = | | text = | ||
॥ इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीभागवततात्पर्यनिर्णये पञ्चमस्कन्धे प्रथमोऽध्यायः ॥ | ॥ इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीभागवततात्पर्यनिर्णये पञ्चमस्कन्धे प्रथमोऽध्यायः ॥ | ||
}} | }} | ||
{{ | {{Bhashyam | ||
| verse_id = BTN_C05_S01_V31 | | verse_id = BTN_C05_S01_V31 | ||
| id = BTN_C05_S01_V31_B1 | | id = BTN_C05_S01_V31_B1 | ||
| text = | | text = | ||
'पूर्वसृष्टान् रथावृत्त्या स्थूलांश्चक्रे प्रियव्रतः । | 'पूर्वसृष्टान् रथावृत्त्या स्थूलांश्चक्रे प्रियव्रतः । | ||
Revision as of 09:01, 10 April 2026
त्वं त्वब्जनाभाङ्घ्रिसरोजकोश-दुर्गाश्रितो निर्जितषट्सपत्नः ।
'विहितो यस्य यो धर्मो विष्णुना प्रभविष्णुना ।
तेन मुक्तिर्भवेत्तस्य तं गुरुर्वेद सर्ववित्॥ इति प्रवृत्तसंहितायाम् ॥ १९ ॥
या वा इह तद्रथचरणनेमिकृतपरिखास्ताः सप्तसिन्धव आसन्यत एव कृता सप्तभुवो द्वीपाः ॥ ३१ ॥
॥ इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीभागवततात्पर्यनिर्णये पञ्चमस्कन्धे प्रथमोऽध्यायः ॥
'पूर्वसृष्टान् रथावृत्त्या स्थूलांश्चक्रे प्रियव्रतः ।
समुद्रांस्तेन तत्कर्तेत्याहुरेनं प्रियव्रतम्॥ इति गारुडे ॥ ३१ ॥