Dwadasha/C5: Difference between revisions
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इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः । | इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः । | ||
Revision as of 09:04, 10 April 2026
वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥
अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥
नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥
गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥
मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥
वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥
हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।
आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः ।