Bruhadaranyaka/C5/S8: Difference between revisions
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Revision as of 07:05, 9 April 2026
मनोमयोऽयं पुरुषो भाः सत्यस्तस्मिन् अन्तर्हृदये यथा व्रीहिर्वा यवो वा स एष सर्वस्येशानः सर्वस्याधिपतिः सर्वमिदं प्रशास्ति यदिदं किञ्च ॥
॥ इति बृहदारण्यकोपनिषदि सप्तमाध्याये अष्टमं ब्राह्मणम् ॥
॥ इति बृहद्भाष्ये सप्तमाध्याये अष्टमं ब्राह्मणम् ॥ ६ ॥
मनोमयो ज्ञानमयः प्रधानं मय उच्यते ।
महाज्ञानात्मकश्चैव भारूपः सद्गुणात्मकः ॥सर्वप्रशासको विष्णुः ......।