Bruhadaranyaka/C5/S12: Difference between revisions
Appearance
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
||
| Line 1: | Line 1: | ||
{{Adhyaya | {{Adhyaya | ||
| document_id = BR | | document_id = BR | ||
| chapter_num = 5 | | chapter_num = 5 | ||
| title = द्वादशं ब्राह्मणम् | | title = द्वादशं ब्राह्मणम् | ||
}} | }} | ||
| Line 14: | Line 10: | ||
| document_id = BR | | document_id = BR | ||
| chapter_id = BR_C05 | | chapter_id = BR_C05 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_line1 = यदा वै पुरुषोऽस्माल्लोकात् प्रैति स वायुमागच्छति । तस्मै स तत्र विजिहीते यथा रथचक्रस्य खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स आदित्यमागच्छति तस्मै स तत्र विजिहीते यथा लम्बरस्य खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स चंद्रमसमागच्छति तस्मै स तत्र विजिहीते यथा दुन्दुभेः खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स लोकमागच्छत्यशोकमहिमं तस्मिन् वसति शाश्वतीः समाः ॥ | | verse_line1 = यदा वै पुरुषोऽस्माल्लोकात् प्रैति स वायुमागच्छति । तस्मै स तत्र विजिहीते यथा रथचक्रस्य खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स आदित्यमागच्छति तस्मै स तत्र विजिहीते यथा लम्बरस्य खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स चंद्रमसमागच्छति तस्मै स तत्र विजिहीते यथा दुन्दुभेः खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स लोकमागच्छत्यशोकमहिमं तस्मिन् वसति शाश्वतीः समाः ॥ | ||
}} | }} | ||
{{ | {{Commentary | ||
| verse_id = BR_C05_S12_V01 | |||
| id = BR_C05_S12_V01_author-note | |||
| name = Bhashyam | |||
| text = | |||
॥ इति बृहदारण्यकोपनिषदि सप्तमाध्याये द्वादशं ब्राह्मणम् ॥ | |||
}} | |||
{{ | {{Commentary | ||
| verse_id = BR_C05_S12_V01 | |||
| id = BR_C05_S12_V01_author-note | |||
| name = Bhashyam | |||
| text = | |||
॥ इति बृहद्भाष्ये सप्तमाध्याये द्वादशं ब्राह्मणम् ॥ | |||
}} | |||
{{Commentary | {{Commentary | ||
Revision as of 04:44, 9 April 2026
द्वादशं ब्राह्मणम्
यदा वै पुरुषोऽस्माल्लोकात् प्रैति स वायुमागच्छति । तस्मै स तत्र विजिहीते यथा रथचक्रस्य खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स आदित्यमागच्छति तस्मै स तत्र विजिहीते यथा लम्बरस्य खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स चंद्रमसमागच्छति तस्मै स तत्र विजिहीते यथा दुन्दुभेः खं तेन स ऊर्ध्वं आक्रमते स लोकमागच्छत्यशोकमहिमं तस्मिन् वसति शाश्वतीः समाः ॥
॥ इति बृहदारण्यकोपनिषदि सप्तमाध्याये द्वादशं ब्राह्मणम् ॥
॥ इति बृहद्भाष्ये सप्तमाध्याये द्वादशं ब्राह्मणम् ॥
प्रवहं वायुपुत्रं च सूर्यसोमौ च विद्युतम् ।
प्राप्य प्रधानवायुं च याति तत्परमं पदम् ॥ इति ब्रह्मांडे ।