Dwadasha/C1: Difference between revisions
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Revision as of 05:37, 8 April 2026
वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥
नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥
जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥
उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥
स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥
शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥
सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥
स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥
पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥
स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥
ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥
सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥