Bruhadaranyaka/C2/S6: Difference between revisions
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| verse_line1 = धृतकौशिकात् धृतकौशिकः। | |||
| verse_line2 = पाराशर्यायणात् पाराशर्यायणः । | |||
| verse_line3 = पाराशर्यात् पाराशर्यो जातूकर्ण्यात् जातूकर्ण्यः । | |||
| verse_line4 = आसुरायणाच्च यास्काच्च आसुरायणस्त्रैवर्णेस्त्रैवर्णिः । | |||
| verse_line5 = औपबन्धनेरौपबन्धनिः । | |||
| verse_line6 = आसुरेः आसुरिर्भारद्वाजात् भारद्वाज | |||
| verse_line7 = आत्रेयात् आत्रेयो माण्टेः। | |||
| verse_line8 = माण्टिर्गौतमात् । | |||
| verse_line9 = गौतमो वात्स्यात् । | |||
| verse_line10 = वात्स्यः शाण्डिल्यात् । | |||
| verse_line11 = शाण्डिल्यः कैशोर्यात् काप्यात्। | |||
| verse_line12 = कैशोर्यः काप्यः कुमारहारितात्। | |||
| verse_line13 = कुमारहारितो गालवात् । | |||
| verse_line14 = गालवो विदर्भीकौण्डिन्यात् । | |||
| verse_line15 = विदर्भीकौण्डिन्यो वत्सनपादो बाभ्रवात्, । | |||
| verse_line16 = वत्सनपाद्बाभ्रवः पथः सौभरात् पन्थाः । | |||
| verse_line17 = सौभरो अयास्यात् आङ्गिरसादयास्य आङ्गिरस आभूतेस्त्वाष्ट्राद् । | |||
| verse_line18 = आभूतिस्त्वाष्ट्रो विश्वरूपात् त्वाष्ट्रात् । | |||
| verse_line19 = विश्वरूपस्त्वाष्ट्रोऽश्विभ्याम् । | |||
| verse_line20 = अश्विनौ दधीच आथर्वणात् । | |||
| verse_line21 = दध्यङ् आथर्वणोथर्वणो दैवाद्। | |||
| verse_line22 = अथर्वा दैवो मृत्योः प्राध्वंसनात् । | |||
| verse_line23 = मृत्युः प्राध्वंसनः प्रध्वंसनात्। | |||
| verse_line24 = प्रध्वंसन एकऋषेः । | |||
| verse_line25 = एकऋषिर्विप्रचित्तेः । | |||
| verse_line26 = विप्रचित्तिः व्यष्टेः । | |||
| verse_line27 = व्यष्टिः सनारोः । | |||
| verse_line28 = सनारुः सनातनात् । | |||
| verse_line29 = सनातनः सनकात् । | |||
| verse_line30 = सनकः परमेष्ठिनः परमेष्ठी ब्रह्मणो। | |||
| verse_line31 = ब्रह्म स्वयम्भुब्रह्मणे नमः ॥ ३ ॥ | |||
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{{AuthorNote| text = ॥ इति वंशब्राह्मणम् ॥}} | |||
{{AuthorNote| text = इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते श्रीमद्बृहदारण्यकोपनिषद्भाष्ये चतुर्थोऽध्यायः ॥}} | |||
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पाराशर्यो जातुकर्ण्यः पराशरसुतावुभौ । | |||
विप्रायामेव भार्यायां तृतीयः कृष्ण एव च ॥ इति ब्रह्माण्डे । | |||
परस्य ब्रह्मणो विष्णोर्हयशीर्षादधीतवान् । | |||
ब्रह्मविद्यामिमां ब्रह्मा ततः सनक एव च ॥ इति गारुडे ॥ | |||
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Revision as of 05:36, 8 April 2026
वंशब्राह्मणम्
अथ वंशः पौतिमाष्यो गौपवनात् ।गौपवनः पौतिमाष्यात् ।
आग्निवेश्यः शाण्डिल्याच्च अनभिम्लाताच्च ।अनभिम्लात आनभिम्लातादानभिम्लातो गौतमात् ।
धृतकौशिकात् धृतकौशिकः।पाराशर्यायणात् पाराशर्यायणः ।
पाराशर्यो जातुकर्ण्यः पराशरसुतावुभौ ।
विप्रायामेव भार्यायां तृतीयः कृष्ण एव च ॥ इति ब्रह्माण्डे ।
परस्य ब्रह्मणो विष्णोर्हयशीर्षादधीतवान् ।
ब्रह्मविद्यामिमां ब्रह्मा ततः सनक एव च ॥ इति गारुडे ॥